"आपने हमारे लिए क्या बनाया है...."

 🔰  *आपने हमारे लिए क्या बनाया*                                                .                                          एक बूढ़े आदमी को उसकी औलाद हर रोज़ ये ताना देती कि:

       "आपने हमारे लिए क्या बनाया है...."

बाबा जी ये सुनकर खामोश हो जाते...

अगली सुबह फिर इसी बहस को लेकर बच्चे अपने बूढ़े बाप का जीना हराम करते और बेचारा बूढ़ा सब्र के साथ अपनी औलाद के इस ताने को सहता भी और सुनता भी लेकिन खामोश रहता...

जब मौत का वक़्त क़रीब आया और बूढ़ा बिस्तरे मर्ग पर लेट गया तो जाते जाते अपने बच्चों को एक कागज़ दे गया जिस पर लिखा था:

                "इस घर के नीचे मेरी उम्र भर की जमा पूंजी है...भारी खज़ाना है..खोद कर निकाल लेना..."

 

ये पढ़ना था कि बच्चों की खुशी का कोई ठिकाना ना रहा.. बड़े एहतिराम से बाप की मय्यत को दफनाया... फिर अगले ही दिन पूरे घर को मल्बे के ढेर में तब्दील कर दिया और खुदाई शुरू कर दी...

खुदाई करते उनकी नज़र एक छोटे से संदूक़ पर पड़ी...जिसे खोला गया तो उसमें एक पर्ची पड़ी थी जिस पर लिखा था:

            "अगर तुम सब इतने ही मर्द हो तो इसी घर को दोबारा बनाओ जिसे मैंने अपना खून पसीना बहा कर तामीर किया था... तुम्हारे सवाल का जवाब भी मिल जाएगा..."

बच्चे रही सही छत भी गंवा बैठे...

आज का नौजवान मां बाप का खिदमत गुज़ार हो या ना हो लेकिन ये सवाल ज़रूर पूछता है-

         "हमारे वालिदैन ने हमारे लिए बनाया क्या है?..."

जिन्होंने बनाया वो भी अज़ीयत में जी रहे हैं-

सच पूछिए तो ऐसी औलादों के साथ ऐसा ही होना चाहिए जैसा उन बाबाजी ने किया...!!!

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