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ढोंग" की जिंदगी
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*जो बदला जा सके उसे "बदलिये",* *जो बदला ना जा सके उसे "स्वीकारिये",* *जो स्वीकारा न जा सके उससे दूर हो जाइये, लेकिन खुद को "खुश" रखिये....* *क्योंकि वह भी एक बड़ी "जिम्मेदारी" है।* *"ढोंग" की जिंदगी से* *"ढंग" की जिंदगी* *कहीं "बेहतर" है/Abdul Aziz https://www.highperformancecpmgate.com/ze2giwsr?key=d5ef9b9a5dc94a9e6d6a26529808cf49
*🌹🌹जो दूसरों को इज़्ज़त देता है* *असल मे वो खुद इज़्ज़तदार होता है*
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*मेरे प्यारे देश वाशियों* रमज़ान के महीने का शुभ आरम्भ है। इस महीने के विशेष नियम हैं। इस में दिन भर संयम का अभ्यास करने के नियम है। इसमें सूर्योदय के एक घंटे पूर्व से लेकर सूर्यास्त तक भूखे-प्यासे रहकर हमें समाज के गरीब वर्ग के लोगों की भूख प्यास दुख तक्लीफ का अहसास होता है, और इंसान ईश्वर के समक्ष सभी प्रकार की बुराइयों से आत्म-समर्पण करता है । आनंद की खोज में पारिवारिक व सामाजिक ज़िम्मेदारियों से भागने का अपराधी इंसान भी 'त्यागी' बन जाता है, पर निंदा, गालम गलोच, कुतर्क, असभ्य भाषा, नाम बिगाड़ना, जैसे अन्य कुकृत्यों में भी कई लोगों को आनंद आता है , यह पवित्र माह ऐसे लोगों के लिए विशेष अवसर होता है कि वो स्वयं को इस समस्त बुराइयों से स्वतंत्र कर लें । मनुष्य स्वार्थी और लालची होता है इसलिए समाज में ब्याज और रिश्वतखोरी जैसी बुराई आम सी बात है , इसलिए इस्लाम ने रिश्वतखोरी को महापाप कहा तो ब्याज को निसेध और वर्जित ठहराया और यह शिक्षा दी कि ब्याज लेने वाला ईश्वर से जंग का ऐलान करता है , इन सभी बुराइयों से छुटकारे के लिए ज़कात यानि एक विशेष प्रकार के दान को अति अनिवार्य किया , यह ए...
Is jahalt se niklo
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औरत सेहरी में सब से पहले जागती है, और सब घर वालों के लिए सेहरी तैयार करती है । लेकिन सब से आख़िर में खाती है । रोज़ा रखने के बाद दोपहरी में बच्चों को खाना खिलाती है ।🍜 फिर 4 बजे के बाद से इफ़्तयारी तक अपने खानदान वालों के लिए इफ़्तयारी तैयार करने में लग जाती है । चावल, पालक, गोशत, चटनी वगैरह तैयार करती है और साथ में यह डर भी रहता है कि पता नही कैसा पका होगा । 🍝🍗🥩🍳 सास और ससुर के लिए अलग चीज़े पकाती है ।🍞🍇 और साथ साथ में इफ़्तयारी से पहले शौहर के गुस्से को सब्र से झेलना भी पड़ता है ।🧕🏻 तारीफ तो दूर की बात । 2-2 रोटियाँ खाने के बाद एक ठंडा ग्लास लस्सी मांगना और कहना कि नमक कम है औऱ खास ठंडा नहीं है ! 🍷🍷 और इफ़्तयारी भी पूरी की पूरी कर ली जनाब ने !! और वो चुपके से किसी कमरे में इफ़्तयारी करती है । तरावीह के बाद पहर से हज़रात के लिए चाय और मेवे तैयार करने हैं ।☕🍪 और फिर से सेहरी में सब से पहले जागना है ।⏰⏰ अगर ख़ुदा न ख़स्ता नही जागी या लैट हो गयी तो सारे खानदान का गुस्सा बेचारी औरत पर गिरता है....सारा दिन । 🙏🏼🙏🏼 आप से दरख्वास्त है कि घर की सारी औरतें, ख्वाह वो माँ हो, बीवी ...