Nojwano Ko jaruri Hedayat

 #नोट :- ये पोस्ट इस्लामी भाईयो के लिये है  ...🙏


क्या आप जानते है ???


नंगे सर पेशाब,पाखाना जाने से इंसान को भूलने की बिमारी हो सकती है....इससे हमारी याददाश्त कमज़ोर होती है....लिहाज़ा याद रखे जब भी इस्तिंजा को जाए या खाना खाए या पानी पिए तो सर को ज़रूर ढँक लीजिये ये हमारे आक़ा मुस्तफा जाने रहमत ﷺ की प्यारी सुन्नत है.....मेने अपने बैतूल खला के बाहिर एक खूंटी लगाकर उसपर टोपी टांग दी है बस अंदर जाओ तो पहनलो बाहिर निकलकर फिर टांग दो...दूसरी बात पैशाब हमैशा बैठकर करे अभी एक जाहिल पाकिस्तानी देवबंदी ने खड़े होकर पैशाब करना जाइज़ बता दिया....


और बैठकर भी ऐसे जैसे टॉयलेट में बैठते है...क्योंकि जब हम जीन्स या पेंट को बग़ैर उतारे पैशाब करते है तो उसकी टाइटनेस की वजह से नसे दब जाती है और पैशाब उन नसों में रह जाता है फिर जब हम खड़े है तो वह रुका पैशाब नसों से रिलीज़ होता है और हम नापाक हो जाते है...हम जब बैठकर पैशाब करते है तो पैशाब की थैली आगे हो जाती है और एक-एक क़तरा तक निकल जाता है जबकि खड़े होकर करने से बीमारी हो सकती है ये सिफ़त सिर्फ़ इंसानों में है बैठकर करने की और जानवरों की मजबूरी है खड़े होकर करने की...अब हम सोचे हम क्या है ?? 


आख़री बात की अगर आप इस डर से कम पानी पीते है कि बार-बार पैशाब आएगा तो ये बेवक़ूफ़ी है क्यूँकि उससे तो और एसिड बढ़ता है और पेशाब जलन के साथ क़तरा-क़तरा आंता है जबकि ज़्यादा पानी पीने से साफ़ और फोर्स से आंता है,


अगर कभी पैशाब में जलन हो तो बिस्तर पर पेट के बल लेट जाएं और कुछ देर पढ़े रहे , आधा दूध आधा पानी मिलाकर पिएं बिल्कुल ठंडा, ओर मिर्च मसाला कम खाये पानी ख़ूब पिया करे....

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