ढोंग" की जिंदगी

 *जो बदला जा सके उसे "बदलिये",*

*जो  बदला ना जा सके उसे "स्वीकारिये",*

*जो स्वीकारा न जा सके उससे दूर हो जाइये, लेकिन खुद को "खुश" रखिये....*

*क्योंकि वह भी एक बड़ी "जिम्मेदारी" है।*

         *"ढोंग" की जिंदगी से*

          *"ढंग" की जिंदगी*

           *कहीं "बेहतर"  है/Abdul Aziz https://www.highperformancecpmgate.com/ze2giwsr?key=d5ef9b9a5dc94a9e6d6a26529808cf49

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